
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले की 1000वीं वर्षगांठ पर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी।
पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और अटूट आस्था का प्रतीक है।
उनके शब्दों में, “सोमनाथ का नाम सुनते ही दिल और दिमाग गर्व से भर जाता है।”
हमले के बावजूद डटकर खड़ा रहा सोमनाथ
साल 1026 में विदेशी आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। पीएम मोदी ने इसे याद करते हुए कहा कि मंदिर की कहानी विनाश नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण और साहस की है। सोमनाथ ने कई हमले झेले, लेकिन कभी डिगा नहीं।
महापुरुषों का योगदान
पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में कई महापुरुषों का जिक्र किया:
- आहिल्याबाई होल्कर
- स्वामी विवेकानंद
- सरदार वल्लभभाई पटेल
उन्होंने कहा कि 1947 में सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की कसम खाई और 11 मई 1951 को मंदिर फिर से भक्तों के लिए खोला गया।
पीएम मोदी ने केएम मुंशी को भी धन्यवाद दिया, क्योंकि उन्होंने मंदिर को खड़ा करने में सरदार पटेल का साथ दिया।
शिवलिंग और श्रद्धा
पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ के शिवलिंग के दर्शन मात्र से इंसान पापों से मुक्त हो जाता है और इच्छाएं पूरी होती हैं। मंदिर सिर्फ वास्तुकला का चमत्कार नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और पीएम मोदी का दौरा
इस साल सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 से 11 जनवरी तक होगा। देशभर से संत, श्रद्धालु और सामाजिक संगठन इसमें हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी खुद 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे।

इतिहास और राजनीति का मसाला
इतिहास हमेशा सिर्फ किताबों में नहीं, सोशल मीडिया पोस्ट्स में भी जीवित रहता है।
1026 में हमला, 1951 में पुनर्निर्माण, 2026 में ब्लॉग पोस्ट।
PM मोदी ने इसे सिर्फ धार्मिक कथा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और साहस का जश्न बताया।
सोमनाथ मंदिर की कहानी हमें सिखाती है, विनाश के बावजूद डटकर खड़ा रहना। साहस और श्रद्धा का महत्व और इतिहास के सबक को याद रखना।
पीएम मोदी के शब्दों में, सोमनाथ न केवल मंदिर, बल्कि भारत की आत्मा है।
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